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स्वामी विवेकानंद का जीवन संदेश: सकारात्मक ध्वनियों-सद्विचारों का सार्वभौमिक कोष

Updated: Sep 10, 2023


भारतीय नवजागरण के अग्रदूत और माँ भारती के सच्चे सपूत राष्ट्रभक्त संत स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति के गौरव एवं भारतीय दर्शन की गहराइयों से रु-ब-रु करते हुए मानव के कल्याण, जनसेवा और नैतिक विकास के जो संदेश दुनियां को दिए है, वो कालजयी है I स्वामी विवेकानंद ने नैतिक आचरण, व्यक्तित्व विकास, सामाजिक सुधार, देश भक्ति, धर्म-अध्यात्म से लेकर युवा शक्ति और मातृ शक्ति की भक्ति, जीवन दर्शन, जिंदगी के असली मकसद और सफलता के फलसफे को अपने जीवन संदेश में बारम्बार उजागर किया है I स्वामी विवेकानंद का जीवन भारतवर्ष ही नहीं बल्कि किसी भी देश, काल, जाति, धर्म, ऊंच-नीच, अपने-पराये जैसे तमामतर विभेदो के परे वैचारिक क्रांति का एक ऐसा प्रकाश-पुंज है, जिसमे सदियों को आलोकित करते रहने की दिव्यता रची-बसी है I उनके विचारों के चंद अंशों को भी आत्मसात कर लिया जाये तो किसी भी कालखंड में कहीं भी मानवीय सरोकारों के विकास व संरक्षण के साथ ही नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति की क्रांति का सूत्रपात किया जा सकता है I चाहे बात राष्ट्र-भक्ति की हो या अंतराष्ट्रीय एकता का अलख जगाने की, लक्ष्य चाहे स्वयं में सोइ शक्तियों को जागृत करने का हो या फिर अध्यात्म का मार्ग पर कदम रखते हुए दिव्यता के दर्शन का, स्वामी विवेकानंद के विचारों की सुरभि से सब कुछ प्राप्त करना संभव है I निराशा में डूबे और परेशानियो में उलझे लोगो में आत्मशक्ति जगाने के लिए स्वामी विवेकानंद के विचारों को एक ऐसा टॉनिक बताया गया है, जो अद्भुत तरीके से तन-मन पर अपना असर डालकर, हमें भीतर तक झंकृत कर देते है I

स्वामी विवेकानंद ने चालीस वर्षो से भी कम के अपने जीवनकाल (जन्म: १२ जनवरी १८६३, निर्वाण: ४ जुलाई १९०२) में धार्मिक, आध्यात्मिक, नैतिक, व सामाजिक मूल्यों तथा मातृभूमि की सच्ची सेवा को अपना ध्येय बनाकर दुनियां में ऐसी नज़ीर पेश की कि वे शक्ति के प्रतीक और मसीहा बनकर अमर-अजर हो गए I युवाओं को अपने सन्देश में स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि 'स्वयं' पे विश्वास रखो I सभी में अलौकिक शक्तियां निहित है I जिससे एक दिन तुम भारतवर्ष का भाग्य लिखोगे I इसके बाद हम अपने विचारों को लेकर दुनियां के देशों में पहुंचेंगे I इस प्रकार हम विश्व के देशों की उन ताकतों के विचार कोष का हिस्सा होंगे, जो अपने देशों को प्रगति के पथ पर ले जाना चाहती है' I उन्होंने युवाओं को अपने जीवन को समाज, देश और मानवीयता की सेवा में समर्पित करने के लिए सदैव प्रेरित किया I स्वामी जी कहते थे 'हे युवा मन, उठो-जागो, समय बहुत कम है, तेज तर्रार बनो, डर को दिमाग से निकाल फेंको I जैसे ही तुम भय का त्याग कर दोगे, जीवन का लक्ष्य आसान हो जायेगा, इसलिए उठो, यह देश तुमसे त्याग और बलिदान मांग रहा है I' उन्होंने कहा कि 'किसने देखा है कि पैसे ने आदमी को बनाया है, सदा व्यक्ति ही अपनी कर्मठता से धन-संपत्ति का सृजन करता है I मानव के ऊर्जा से ही सारे संसार का अस्तित्व है I हमारे पास विश्वास और जोश कि असीम पूंजी है I विश्व तुम्हारी ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा हैं I अपनी रगों में बह रहे जोश को जागृत कर युवाओं आगे बढ़ो, कभी भी अपने मन में यह विचार मत लाओ कि मैं निर्धन हु या मेरा कोई मित्र नहीं हैं I अपनी जीवन में दैवीय शक्ति के प्रतिमूर्ति के रूप में देश-विदेश के लाखो युवाओं के मन में नवचेतना का अलख जगाने वाले विवेकानंद ने अपने विचार श्रृंखलाओं से युवाओं को राष्ट्र निर्माण के पथ पर लगाया I यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी हैं I

Manmohan Harsh's Message to India' Youth
Visualize the change, Be the change and Lead the change, you wish to see in society and the country. India's Proud Son and The Real Hero Swami Vivekananda's teachings guide us to march on the path of the Nation's service. Start with a Pocket Book, "VIVEKANANDA SPEAKS TO YOU (Published by Sri Ramakrishna Math, Mylapore, Chennai) and this shall pave the way for more and more findings and reading of his life-changing messages. 

पुरखो द्वारा सौंपी गई विरासत को सहजने और उस पर गर्व करने की सीख भी विवेकानंद के संदेशों में मिलती हैं I वे कहते थे कि' अगर हमें लगता हैं कि समाज में कहीं कोई कमी-खामी हैं तो हम इसकी ही संतान हैं, इसे दूर करने के लिए जी जान से जुटे, इसके लिए ख़ुशी ह्रदय की धमनियों में बह रहे रक्त का उपयोग भी करे I और अगर ऐसा नहीं करते तो फिर हमारा जीवन निरर्थक हैं I हम समाज की कमियों को दूर करने के लिए अपने बौद्धिक चातुर्य का उपयोग करे, लेकिन निंदा कभी न करे I समाज के विरुद्ध एक भी कठोर शब्द का उपयोग न करे, मुझे सदैव अपने अतीत की महानता पर गर्व होता हैं I'

साहस को जीवन आधार बताने वाले वाले विवेकानंद ने कायरता को सिरे से ख़ारिज किया I वे कहते थे ' मज़बूती जीवन हैं और कमजोरी मौत का दूसरा नाम हैं I बहादुर बनो, विशाल ह्रदय वाले इंसान बनो, जूनून कि हद तक साहस का मार्ग ही अपनाओ I कायर लोग जीवन में केवल पाप ही करते हैं, बहादुर लोग कदापि नहीं, यहाँ तक कि वे अपने दिमाग में भी पाप करना सोच भी नहीं सकते I'  

विवेकानंद ने दुसरो के कल्याण और उत्थान के लिए जीवन को खपा देने की नसीहत दी, इसे ही असली खुशियों के ख़ज़ाने कि चाभी बताते हुए कहा कि दुसरो के लिए किया गया थोड़ा सा कार्य ही व्यक्ति की भीतरी शक्तियों को इस हद तक जागृत कर देता हैं, उसे ऐसे महसूस होता हैं जैसे मन में सोया कोई शेर जग गया हो I उन्होंने कहा कि गरीब, वंचित और उपेक्षित वर्ग के लोगो के लिए तब तक कार्य करते रहे, जब तक कि तुम्हे यह न लगे कि अब दिल कि धड़कने बंद होने वाली हैं, मस्तिष्क की शक्ति जब जवाब दे रही हैं और कही तुम पागल न हो जाओ I ऐसा करने के बाद अपना तन-मन परमशक्ति के चरणों में अर्पित कर दो I फिर जीवन में अद्वितीय शक्ति और ऊर्जा की धाराएं प्रवाहित होगी I जैसे-जैसे हम स्वामी विवेकानंद के जीवन संदेश और उनकी शिक्षाओं के करीब आते हैं, उनको आत्मसात करते हुए खुद को मानवता के कल्याण के लिए समर्पित करने की राह पर बढ़ने लगते हैं, हमें इस बात का बखूबी एहसास होने लगता हैं कि उनके द्वारा बोये गए सद्विचारों कि बीज कालांतर में कल्पवृक्ष बन कर हज़ारो लाखो लोगो के जीवन की दिशा और ध्येय को बदल रहे हैं I यह सिलसिला अनवरत जारी हैं, देखा जाये तो यह अनंतकाल तक जारी रहने वाली महागाथा हैं I विवेकानंद के विचारों की भांति हमारे पास मौजूद उस पारस की मानिंद हैं, जिससे होकर गुजरने मात्रा से जीवन स्वर्णिम पलों के ख़ज़ाने की सौगात में बदल सकता हैं I

About the author
Manmohan Harsh is a seasoned Public Relations and Communications Professional, boasting an impressive 17-year career as Deputy Director with the Information and Public Relations Department of the Government of Rajasthan, Jaipur. As a freelance media contributor for over three decades, he has made substantial contributions, with more than 3000 articles published in prestigious publications across the country. His article, titled 'Relevance of Swami Vivekananda's ideas in the 21st century,' stood out as the first runner-up in 'The Trailblazers 2023,' a highly regarded national-level article writing competition hosted by the Youthisthan Foundation. In his article, Manmohan Harsh provides insightful perspectives on the enduring relevance of Swami Vivekananda's ideas, reinforcing their importance in the context of the 21st century, a testament to his vast experience and thoughtful analysis.

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